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पश्चिम बंगाल में पीएम सूर्य घर: असल में कैसे काम करता है, क़दम-दर-क़दम

पीएम सूर्य घर: मुफ़्त बिजली योजना में घर के मालिकों को रूफटॉप सोलर के लिए केंद्रीय सहायता सीधे उनके बैंक खाते में मिलती है। यह योजना अच्छी तरह काम करती है, पर तभी जब सारे चरण सही क्रम में हों और काग़ज़ आपस में मेल खाएँ। पश्चिम बंगाल में यह प्रक्रिया ऐसे चलती है।

आपको क्या मिलता है

सहायता प्रति किलोवाट के हिसाब से मिलती है: 1 kW के लिए ₹30,000, 2 kW के लिए ₹60,000, और 3 kW या उससे ऊपर के लिए ₹78,000, जो अधिकतम सीमा है। हाउसिंग सोसाइटियों को कॉमन सुविधाओं के लिए अलग दर मिलती है। ये सरकारी आँकड़े हैं और बदल सकते हैं, इसलिए हर बार आवेदन करते समय हम लागू अधिसूचना जाँच लेते हैं।

कौन पात्र है

  • आवेदक के नाम पर घरेलू बिजली कनेक्शन।
  • ऐसी छत जो आपकी अपनी हो, या जिसके इस्तेमाल की आपके पास लिखित अनुमति हो।
  • DCR पैनल (भारतीय सेल से बने), जिन्हें नेशनल पोर्टल पर आपकी DISCOM के लिए रजिस्टर्ड वेंडर लगाए।
  • एक कनेक्शन पर एक ही सब्सिडी।

सभी चरण, क्रम से

  1. पीएम सूर्य घर नेशनल पोर्टल पर अपने राज्य, DISCOM, कंज़्यूमर नंबर और मोबाइल नंबर के साथ रजिस्टर करें।
  2. पोर्टल के ज़रिए रूफटॉप सोलर के लिए आवेदन करें और एक रजिस्टर्ड वेंडर चुनें।
  3. फ़िज़िबिलिटी: DISCOM जाँचती है कि आपका कनेक्शन प्लांट को सँभाल सकता है या नहीं। छत पर कुछ भी लगाने से पहले इस मंज़ूरी का इंतज़ार करें।
  4. DCR पैनल और नियमों के अनुरूप इन्वर्टर के साथ प्लांट लगवाएँ।
  5. पोर्टल पर प्लांट का विवरण जमा करें और नेट मीटर के लिए आवेदन करें।
  6. इंस्पेक्शन और नेट मीटर: DISCOM प्लांट का इंस्पेक्शन करती है, नेट मीटर लगाती है और पोर्टल पर कमीशनिंग दर्ज करती है।
  7. बैंक विवरण: आप अपने बैंक खाते का विवरण जमा करते हैं, और सहायता उसी खाते में आ जाती है।

Solarverse से लगवाने पर चरण एक से छह तक हम संभालते हैं और चरण सात के लिए सब कुछ तैयार करते हैं। आप हस्ताक्षर करते हैं; आवेदन और फ़ॉलो-अप हम करते हैं।

वे ग़लतियाँ जिनसे सब्सिडी अटकती या रद्द होती है

  • Non-DCR पैनल। सबसे महँगी ग़लती। अगर पैनल DCR नहीं हैं, तो प्लांट बनने के बाद दावा ख़ारिज हो जाता है। कोई भी भुगतान करने से पहले मॉड्यूल का मॉडल नंबर लिखित में माँगें।
  • फ़िज़िबिलिटी से पहले इंस्टॉलेशन। DISCOM की मंज़ूरी से पहले प्लांट लगा देने से दावा डूब सकता है।
  • नाम मेल न खाना। बिजली कनेक्शन, आवेदक और बैंक खाता, तीनों एक ही नाम पर होने चाहिए। अगर कनेक्शन अब भी माता-पिता या पिछले मालिक के नाम पर है, तो पहले उसे ठीक करवाएँ।
  • सैंक्शन लोड बहुत कम। प्लांट सैंक्शन लोड से बड़ा नहीं हो सकता, इसलिए पहले लोड बढ़ाने की मंज़ूरी लेनी होगी।
  • अनरजिस्टर्ड वेंडर। इंस्टॉलर का पोर्टल पर आपकी DISCOM के लिए रजिस्टर्ड होना ज़रूरी है।
  • ज़रूरत से बड़ा DCR ऐरे। सब्सिडी तय है, पर हर अतिरिक्त DCR पैनल की लागत ज़्यादा होती है। बड़े घरों को दोनों विकल्पों की तुलना करनी चाहिए; देखें DCR बनाम Non-DCR।

लोन

पात्र घर पोर्टल के ज़रिए रियायती, बिना गारंटी (कोलैटरल-फ़्री) बैंक लोन के लिए भी आवेदन कर सकते हैं। बैंक जो प्रस्ताव और दस्तावेज़ माँगता है, वे हम देते हैं।

कहाँ से शुरू करें

हमें अपने बिजली बिल की एक फ़ोटो भेजें। हम आपकी पात्रता, सही साइज़ और आपकी छत के लिए सही DCR मॉड्यूल मुफ़्त में बता देंगे। सब्सिडी पेज पर योजना एक नज़र में दी गई है, और यह गाइड साइज़ तय करने में मदद करती है।

झटपट जवाब

पश्चिम बंगाल में पीएम सूर्य घर सब्सिडी कितनी है?

केंद्रीय सहायता 1 kW के लिए ₹30,000, 2 kW के लिए ₹60,000 और 3 kW या उससे ज़्यादा के लिए ₹78,000 है, जो कमीशनिंग के बाद आपके बैंक खाते में आती है।

क्या Non-DCR पैनल पर सब्सिडी मिल सकती है?

नहीं। इस योजना में भारतीय सेल से बने DCR मॉड्यूल ज़रूरी हैं।

सब्सिडी कब मिलती है?

जब DISCOM प्लांट का इंस्पेक्शन कर ले, नेट मीटर लगा दे और पोर्टल पर कमीशनिंग दर्ज कर दे, और आप अपना बैंक विवरण जमा कर दें।

SV
Solarverse टीम

Solarverse Solutions, सिलीगुड़ी की डिज़ाइन, इंस्टॉलेशन और सर्विस टीम। हम Waaree के अधिकृत चैनल पार्टनर हैं। हम पश्चिम बंगाल, सिक्किम और बिहार में छतों का सर्वे करते हैं, बिजली बिल पढ़ते हैं और सोलर प्लांट लगाते हैं।

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