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नेट मीटरिंग, टाइम-ऑफ़-डे और मंज़ूरियाँ

पश्चिम बंगाल में नेट मीटरिंग, आसान भाषा में · टाइम-ऑफ़-डे बिल: सोलर की यूनिट कहाँ गिनी जाती हैं · मंज़ूरियाँ: नेट मीटरिंग, CEIG और असल ख़र्च पर फ़ीस

पश्चिम बंगाल में नेट मीटरिंग, आसान भाषा में

पश्चिम बंगाल के रूफटॉप नियम WBERC Grid Interactive Rooftop Solar PV (Prosumers) Regulations, 2025 से नए सिरे से लिखे गए, जो 31 जुलाई 2025 को अधिसूचित हुए। लगभग हर घर और कारोबार के लिए नतीजा सीधा-सादा नेट मीटरिंग है।

  • कौन: कोई भी उपभोक्ता जिसकी कॉन्ट्रैक्ट डिमांड कम से कम 1 kW हो।
  • कितना बड़ा: 1 kW से 500 kW तक, या आपकी कॉन्ट्रैक्ट डिमांड / सैंक्शन लोड — जो भी कम हो।
  • कैसे काम करता है: ग्रिड को भेजी गई यूनिट, ग्रिड से ली गई यूनिट में से आपके अपने टैरिफ़ पर घटा दी जाती हैं, यानी भेजी गई एक यूनिट की क़ीमत उतनी ही है जितनी उस यूनिट की, जिसे ख़रीदने से आप बच गए।
  • कैरी-फ़ॉरवर्ड: बची हुई यूनिट अगले बिल में जाती हैं — लेकिन हर साल 1 अप्रैल को ये शून्य हो जाती हैं, और इनका कोई भुगतान नहीं मिलता।
  • एक मीटर, एक प्लांट: नेट मीटरिंग हर कंज़्यूमर नंबर पर अलग से काम करती है। दो कनेक्शन के लिए दो सिस्टम चाहिए।
  • कनेक्शन: 170 kW (200 kVA) तक लो टेंशन; उससे ऊपर 11 kV।
आपके लिए इसका मतलब: जो प्लांट साल भर में आपकी खपत से ज़्यादा बिजली बनाता है, वह बची हुई यूनिट 1 अप्रैल को बस मुफ़्त में दे देता है। इसीलिए हम साइज़ खपत के हिसाब से तय करते हैं, छत के आकार के हिसाब से कभी नहीं।

टाइम-ऑफ़-डे बिल: सोलर की यूनिट कहाँ गिनी जाती हैं

पश्चिम बंगाल में कई कमर्शियल और इंडस्ट्रियल कनेक्शन का बिल टाइम-ऑफ़-डे के हिसाब से बनता है, जिसमें तीन ब्लॉक होते हैं:

पीकशाम 5 – रात 11 बजे · सबसे ऊँचा रेट
नॉर्मलसुबह 6 – शाम 5 बजे · जब सोलर बिजली बनाता है
ऑफ़-पीकरात 11 – सुबह 6 बजे · सबसे कम रेट

2025 के नियमों के तहत, हर ब्लॉक की खपत उसी ब्लॉक के उत्पादन से घटाई जाती है। बची हुई यूनिट सिर्फ़ नीचे, यानी अगले कम टैरिफ़ वाले ब्लॉक में जाती हैं। सोलर नॉर्मल ब्लॉक में बिजली बनाता है, इसलिए उसकी बची यूनिट ऑफ़-पीक तक पहुँच सकती हैं — लेकिन पीक ब्लॉक तक कभी नहीं।

  • इंडस्ट्रियल प्लांट का साइज़ पहले अपनी नॉर्मल-बैंड खपत के हिसाब से तय करें; ऑफ़-पीक बची हुई बिजली के लिए है।
  • पीक समय की यूनिट तक पहुँचने का एकमात्र तरीक़ा है शाम को डिस्चार्ज होने वाली बैटरी।
  • अगर आप ToD कैटेगरी छोड़ना चाहते हैं, तो यह नेट मीटरिंग का आवेदन करने से पहले करें, बाद में नहीं।
दूसरे राज्यों में नियम अलग हैं। बिहार में 1 अप्रैल 2026 से टाइम-ऑफ़-डे बिलिंग 10 kW से ऊपर के ज़्यादातर कनेक्शन और सभी स्मार्ट मीटर पर लागू है, जिसमें सुबह 9 से शाम 5 बजे तक नॉर्मल रेट का 80% और शाम 5 से रात 11 बजे तक 120% लगता है। सिक्किम में बची यूनिट का समायोजन फिर किसी और क्रम में होता है। हम आपके राज्य का नियम और आपका अपना बिल पढ़ते हैं — एक राज्य का नियम दूसरे राज्य पर कभी लागू नहीं करते।

मंज़ूरियाँ: नेट मीटरिंग, CEIG और असल ख़र्च पर फ़ीस

  • नेट-मीटरिंग आवेदन आपके DISCOM को — हम इसे तैयार करके फ़ाइल करते हैं।
  • पश्चिम बंगाल में 10 kW तक के लिए अलग से तकनीकी फ़िज़िबिलिटी स्टडी की ज़रूरत नहीं है।
  • पश्चिम बंगाल में 100 kW और उससे ऊपर के प्लांट को चालू (एनर्जाइज़) करने से पहले मुख्य विद्युत निरीक्षक कार्यालय (CEIG) की मंज़ूरी ज़रूरी है।
  • फ़िटनेस सर्टिफ़िकेट 170 kW तक हर 3 साल में और उससे ऊपर हर 2 साल में रिन्यू होते हैं।

DISCOM की आवेदन फ़ीस, नेट-मीटर शुल्क, CEIG फ़ीस और सिक्योरिटी डिपॉज़िट यूटिलिटी या राज्य तय करते हैं। इनका भुगतान असल ख़र्च पर होता है। हम इन्हें लिखित में बताते हैं और हर दस्तावेज़ फ़ाइल करते हैं, लेकिन इन्हें किसी गोल-मोल रक़म में कभी नहीं छिपाते।

क्या आप चाहेंगे कि आपका बिल हम पढ़ें?

इसे WhatsApp पर भेजें। हम इसे समझकर बताएँगे कि इनमें से कौन-से नियम लागू होते हैं, और उसी हिसाब से प्लांट का साइज़ तय करेंगे।